मदर इंडिया से लगान तक... ऑस्कर के लिए नॉमिनेट हुईं ये फिल्में, लेकिन एक वोट से रह गई थी पीछे

खबरों की मानें तो फिल्म मदर इंडिया को लेकर वोटिंग रविवार को हुई और उस दिन विदेशों में आमतौर पर छुट्टी रहती है. इस कारण उस फिल्म को देखने के लिए जूरी के पूरे सदस्य ही नहीं पहुंचे और जो पहुंचे थे उनके बीच ही वोटिंग करवाई गई. जिस वजह से फिल्म को कम वोट मिले.
मदर इंडिया से लगान तक... ऑस्कर के लिए नॉमिनेट हुईं ये फिल्में, लेकिन एक वोट से रह गई थी पीछेमदर इंडियाImage Credit source: ट्विटर
ऑस्कर अवॉर्ड को लेकर लोगों में एक अलग एक्साइटमेंट देखने को मिलता है. ये उत्सुकता सिने प्रेमियों के लिए बहुत मायने भी रखती है. क्या आप जानते हैं कि अब तक तीन भारतीय फिल्मों ने Best Foreign Language Film की कैटेगरी में ऑस्कर नॉमिनेशन को हासिल किया है. उन फिल्मों में लोगों की सबसे पसंदीदा फिल्म मदर इंडिया का नाम भी शामिल है. फिल्म भारत के सदियों पुराने आदर्श के प्रति समर्पित थी. लेकिन, मदर इंडिया तीसरे पोल के बाद महज एक वोट से ऑस्कर अवॉर्ड (Oscar Awards) जीतने से चूक गई थी. इसके अलावा इस लिस्ट में दो और फिल्में हैं जिन्हें ऑस्कर में भेजा गया था.
भारत के लिए मदर इंडिया का एक वोट से चूक जाना किसी सदमे से कम नहीं था. उस साल बेस्ट फॉरेन फिल्म का अवॉर्ड इटालियन प्रोड्यूसर डीनो डे लॉरेन्टिस की फिल्म ‘नाइट्स ऑफ केबिरिया’ को मिला था. अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर मदर इंडिया को ये खिताब क्यों नहीं मिला. दरअसल, सेलेक्शन बोर्ड को किसी ने ये नहीं स्पष्ट किया था कि भारतीय नारी अपने सिंदूर के लिए कितनी समर्पित होती है. फिल्म भारत के सदियों पुराने आदर्श के प्रति समर्पित थी. ऑस्कर जीतने के लिए फिल्म की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को स्पष्ट करने के लिए वहां एक प्रचार विभाग नियुक्त किया जाना चाहिए था.
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खबरों की मानें तो फिल्म मदर इंडिया को लेकर वोटिंग रविवार को हुई और उस दिन विदेशों में आमतौर पर छुट्टी रहती है. इस कारण उस फिल्म को देखने के लिए जूरी के पूरे सदस्य ही नहीं पहुंचे और जो पहुंचे थे उनके बीच ही वोटिंग करवाई गई. इस वोटिंग में उस फिल्म को प्रतिद्वंद्वी फिल्म से एक वोट कम मिला और वो ऑस्कर अवॉर्ड से एक कदम दूर रह गई. 60 साल से अधिक पुरानी 1957 में रिलीज हुई दिवंगत एक्ट्रेस नुतन और एक्टर सुनील दत्त की फिल्म मदर इंडिया का उस भारतीय फिल्म के साथ यही दुर्भाग्य जुड़ा है.
साल 1988 में सलाम बॉम्बे भी हुई नॉमिनेट
इसके बाद जो फिल्म ऑस्कर्स में फाइनल पांच में पहुंच पाई थी, उनमें 1988 में आई मीरा नायर की फिल्म सलाम बॉम्बे और आमिर खान की 2001 में आई फिल्म लगान शामिल हैं. हालांकि, ये फिल्म भी अवॉर्ड को जीतने में असफल रही. लेकिन, डायरेक्टर मीरा नायर की इस फिल्म ने न्यूयॉर्क टाइम्स की उन 1000 फिल्मों में अपना नाम दर्ज कराया था, जिन्हें सर्वकालिक महानतम फिल्मों की लिस्ट के लिए चुना गया था.ये भी पढ़ें

2001 में आई ‘लगान’ ने भी छोड़ी छाप
भारतीय किसानों पर बनी फिल्म ‘लगान’ दर्शकों को खूब पसंद आई थी. 74वें अकादमी पुरस्कारों में पहली सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा की श्रेणी में इसको शामिल किया गया था. आमिर खान की फिल्म बॉलीवुड की वो आखिरी फिल्म थी, जिसका चयन ऑस्कर अवॉर्ड के लिए किया गया था. भारतीय सिनेमा पर अपनी छाप छोड़ने वाली यह फिल्म आस्कर में नाकाम रही. कई मायनों में इन तीनों फिल्मों को भारत की सबसे ऐतिहासिक फिल्मों में से भी एक माना जाता है.

By Nikita

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