Punyashlok Ahilyabai : रानी अहिल्याबाई की विरासत का अनुभव करने के लिए महेश्वर जाना चाहती हैं एक्ट्रेस ऐतशा संझगिरी

Punyashlok Ahilyabai : रानी अहिल्याबाई की विरासत का अनुभव करने के लिए महेश्वर जाना चाहती हैं एक्ट्रेस ऐतशा संझगिरी

रानी अहिल्याबाई की कहानी सभी के लिए प्रेरणादायी हैं. सोनी टीवी के ‘पुण्यश्लोक अहिल्याबाई’ (Punyashlok Ahilyabai) में प्रमुख किरदार ऐतशा संझगिरी निभा रही हैं. यह शो सोनी टीवी के मशहूर सीरियल्स में से एक है.
महेश्वर जाना चाहती हैं एक्ट्रेस ऐतशा संझगिरीहमारे देश में, खास तौर पर मध्य प्रदेश के समृद्ध इतिहास में अहिल्याबाई होल्कर की उपलब्धियों, बुद्धिमानी और साहस ने एक महत्वपूर्ण प्रभाव छोड़ा है. उनकी विरासत आज भी कई मंदिरों, धर्मशालाओं और बहुत-से समाज कार्यों के रूप में देखने को मिलती है, जिनके लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया था. सोनी टीवी (Sony Tv) का महाधारावाहिक पुण्यश्लोक अहिल्याबाई (Punyashlok Ahilyabai) हमें इस रानी की जीवन यात्रा पर ले जाता है, जिन्होंने अपनी बुद्धिमानी से शांति और समृद्धि स्थापित की और यह साबित किया कि कोई भी इंसान अपने लिंग या जन्म से नहीं, बल्कि अपने कर्मों से महान बनता है.
अपने ससुर मल्हार राव होल्कर के अटूट समर्थन के साथ अहिल्याबाई होल्कर ने नारी सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त किया. इस शो में अहिल्याबाई होल्कर का रोल निभा रहीं एक्ट्रेस ऐतशा संझगिरी ने हर बार इस लेजेंडरी किरदार को निभाने के लिए अपनी खुशी और सम्मान जताया है. वो अपने इस रोल काफी प्रेरित हैं. महेश्वर साड़ी अध्याय के वर्तमान ट्रैक में दिखाया जा रहा है कि किस तरह अहिल्याबाई महिलाओं को काम करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं, जिससे पुरुषवादी जड़ें हिल जाती हैं. इस ट्रैक से प्रेरित होकर ऐतशा संझगिरी भी रानी अहिल्याबाई की विरासत का अनुभव करने के लिए महेश्वर जाना चाहती हैं.
इंदौर जाने के लिए उत्सुक हैं ऐतशा
इस बारे में बताते हुए ऐतशा संझगिरी कहती हैं, “मैं इंदौर, खास तौर पर वहां की रेहवा सोसाइटी में जाने के लिए बहुत उत्सुक हूं. जैसा कि सभी जानते हैं कि माहेश्वरी हैंडलूम का नाम महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने दिया था. उनके शासन को स्वर्णिम युग कहा जाता था और आज भी महेश्वर में सभी लोग उन्हें देवी अहिल्याबाई या मां साहब के रूप में मानते हैं. उन्होंने शहरों में कई इमारतें बनवाईं और सार्वजनिक कार्य कराए और अपने राज्य की खुशहाली सुनिश्चित की.”
जानिए क्या हैं ऐतशा का कहना
ऐतशा आगे कहती हैं कि यह देखना बड़ा खुशनुमा एहसास होगा कि उन्होंने किस तरह अपनी दूरदृष्टि को भारत के गौरवशाली अध्याय में बदल दिया, खास तौर पर कपड़ा उद्योग के मामले में. उनके प्रयासों के जरिए धीरे-धीरे इस कला को शाही संरक्षण मिल गया और इस तरह महेश्वर में हथकरघा बुनाई परंपरा की शुरुआत हुई. महेश्वरी साड़ियों के जरिए उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद की, उनका हौसला बढ़ाया और मालवा के आर्थिक विकास में योगदान दिया. यह ऐसी कहानी है, जिसे बताया जाना चाहिए और मैं ऐसा करके बेहद सम्मानित महसूस कर रही हूं.”
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